गौतम बुद्ध की कहानी। Stories of Gautam duddha Part -1. Hindi kahani.

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Stories of Gautam duddha

गौतम बुद्ध की कहानी। Stories of Gautam duddha Part -1. Hindi kahani.

यह कहानी भगवान गौतम बुद्ध की है। यह बात शुरुआत दिनों की है जब गौतम बुध अपने शिष्यों के साथ भ्रमण पर निकले हुए थे। गांव से गांव शहर से शहर जाया करते थे प्रवचन दिया करते थे अपने शिष्यों को रोजाना नया नया पाठ पढ़ाते थे। उन्हें समझाते थे कि जिंदगी का मतलब क्या है। एक दिन ऐसे ही भ्रमण करते करते एक गांव से दूसरे गांव निकले थे रास्ता काफी लंबा था। 

 

 चलते-चलते देर हो गई। दोपहर का समय था जोरो की प्यास लगी हुई थी। एक बरगद के पेड़ के नीचे आराम करने के लिए रुक गए। अपने एक शिष्य से कहा आप एक काम कीजिए। आप इस बरगद के पेड़ से 20 कदम दूर जाइये।  दो बार परिक्रमा लगाइए चक्कर लगाइए उसके बाद वापस आइए शिष्य ने वैसा ही किया वह 20 कदम आगे गया परिक्रमा लगाया और वापस आया। 

 

भगवान गौतम बुद्ध ने उससे पूछा एक बात बताइए आपको कहीं से ठंडी हवा आ रही थी क्या आपको महसूस हुई थी। उसने बताया हां उत्तर दिशा से ठंडी हवा आ रही है। तो भगवान गौतम बुद्ध ने कहा एक काम कीजिए आप उसी दिशा में जाइये कोई ना कोई पानी का स्थान जरूर होगा। और बर्तन साथ लेकर जाइए और पानी भर कर लाइए।  सभी को बहुत प्यास लगी है। 

 

शिष्य ने वैसा ही किया, जिसे ही वहां गया और देखा तो वाकई में वहां एक तालाब था।  वह गांव का तालाब था गांव वाले कुछ ना कुछ activate कर रहे थे कोई अपने कपड़े धो रहा था, कोई खुद नहा रहा था। कोई अपने भैंसों को नहला रहा था। उस पूरे तालाब का माहौल गंदा हो चुका था। वहां बहुत भीड़ थी पूरा तालाब का पानी गंदा कर रखा था, मैंला कर रखा था। गंदा पानी। उस शिष्य को गांव वालों पर गुस्सा आने लगे यह कोई नहलाने की जगह है कोई कपड़े धो रहे कोई भैंसों को नहला रहे हैं। यह कर रहे हैं वह कर रहे हैं पूरा पानी का तालाब गंदा कर रखा था। स्वच्छता नहीं रख सकते।

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 गुस्सा करने लगा कि कुछ अपने गुरुदेव के लिए बर्तन में पानी भर के लिए जाना था बहुत देर उसने सोचा कि क्या करूं क्या ना करूं तब एक और गांव वाला आया और उसके साथ और भैंसे भी और उसने भैंसों को पानी मे  उतार दी। और पानी ज्यादा गंदा हो गया। उसको चाहकर भी कुछ नहीं बोल पाए क्योंकि गुरुदेव ने सिखाया था कि शांत रहना है। वह शिष्य वहां से वापस आया उस बरगद के पेड़ के नीचे जहाँ भगवान गौतम बुद्ध अपने शिष्य के साथ में बैठे थे। और आकर के माफी मांगी की मुझे माफ कर दीजिए मैं आपके लिए पानी नहीं ला सका।

 

  उन्होंने पूछा कि क्या हुआ। वह उसके अंदर जो गुस्सा भर के रखा था उसने वो निकाल दिया। वहां कोई नहा रहा है, कोई अपने कपड़े धो रहा है, कोई भैंस को नहला रहा है पूरे तालाब का पानी गंदा कर रखा है। वह गंदा पानी आपके लिए कैसे ले करके आता। आपको गंदा पानी कैसे पिलाता।

 

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Part – 2 👉  गौतम बुद्ध

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