Motivational story in hindi. एक पिता और पुत्र की कहानी। hindi kahani.

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एक पिता और पुत्र की कहानी। hindi kahani.

 Motivational story in hindi. एक पिता और पुत्र की कहानी। hindi kahani.

एक दिन पिता और बेटा दोनो शाम के समय बाहर घूमने जाते है। वो एक खेत के पास जाकर रुकते है जहां एक किसान उस खेत मे काम कर रहा था। और पिता ने देखा कि किसान के जूते बाहर रखे थे। बेटे ने कहा पापा ये किसका जुता है, तो पिता कहता है , ये जूते जो खेत मे काम कर रहे है उस किसान के है। बेटे को एक मजाक सुझी। बेटा अपने पिता से कहता है। पापा थोड़ी मस्ती करे इस किसान से, जीवन मे आनंद तो मस्ती से ही आता है। पिता कहता है कैसी मस्ती। बेटा कहता है क्यों ना इस किसान के जूते को कहीं छुपा देते है। और जब किसान अपने जूते ढूंढेगा तो उसकी चिंता और व्याकुलता को देख के बड़ा मजा आएगा। पिता को यह बात पसंद नहीं आया। उसे थोड़ा दुख होने लगा। फिर पिता ने अपने बेटे से कहा कि नहीं बेटा कभी यह शरारत मत करना। यह गलत बात है। तुम्हारी नजर में किसी चीज की कोई किम्मत नही है एक गरीब किसान के लिए ये बहोत ही कीमती चीज है। जूते उनके लिये बहोत कीमती हो सकते है। 

Motivational hindi story.

अगर तुम मजा लेना चाहते हो तो चलो कुछ नया प्रयास करते है। बेटा कहता है वो कैसे ? पिता कहता है तुम एक काम करो ये थोड़े सिक्के लो और वो जूते में थोड़े थोड़े दाल दो। फिर देखते है इस से उस किसान पर क्या प्रभाव पड़ता है। पिता और पुत्र जूते में सिक्के डाल के एक पेड़ के पीछे छुप गए। अब देखना क्या होता है। जब किसान अपना काम पूरा कर के बाहर निकला ओर एक जूते में पैर डाला तो उसे लगा कि जूते में कुछ पड़ा है। जूते में देखता है तो अंदर सिक्के होते है। सिक्के को देख कर वो बहोत चौक गया। जूते में सिक्के किसने रखे होंगे। यहाँ तो दूर दूर तक कोई नहीं दिख रहा। उसने दुसरे जूते में देखा तो उस में भी सिक्के पड़े थे। 


दोनो जूते मेसे सिक्के निकाले और रोने लगा। भगवान को धन्यवाद देने लगा। किसान को लगा कि शायद ऊपर वाले ने ही किसी को मेरी मदद के लिए भेजा होगा। मुझे इन सिक्कों की बहोत जरूरत भी और आपने वो पूरा कर दिया। वो किसान भगवान को धन्यवाद करने लगा। इन सिक्कों से मेरे बच्चे आज भर पेट खाना खायेंगे। यह देख कर उस बच्चे के आँख में आँसू आगये। और वो बच्चा भी रोने लगा। और अपने पिता से कहता है कि आज मेने आनंद का असली मतलब समझा हूं। 


पिता ने अपने बेटे को यही समझाया कि असली मजा किसी को परेशान करने में नही। किसी को सुख देने में मिलता है।


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