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लालची को दया नहीं आती।

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 रामु को सो विघा जमीन पे उसका खेत था। रामु के खेत मे बहोत सारे अनाज होते थे। रामु रोज अपने खेत मे काम करने आता। एक दिन रामु पेड़ के छएँ में आराम कर रहा था। तभी झाड़ी से एक कोब्रा साप निकला। रामु ने जब उस साप को देखा तो उसे एक आइडिया आया, की मेरे खेत का देगभाल यह साप से हों सकता है। जब कोब्रा साप मेरे खेत मे हमेशा के लिए रहेगा तो रात को मुझे खेत की कोई चिंता नहीं रहेगी। इस लिए उसने साप को दूध पिलाया और उसके सपने हाथ जोड़कर शान्ति से घर जाने के लिए निकल पड़ा।

 दूसरे दिन रामु खेत मे आकर देखा तो साप को जिस कटोरे में दूध पिलाया था उस कटोरे में एक सोने का सिक्का पड़ा था। रामु खुश हो गया। ऐसा रोज होने लगा, इस लिए रामु को विश्वास हो गया कि साप को इधर मन लगने लगा है, और यह जादुई साप खुश होकर मुझे सोने का सिक्का देती है। इसलिए रामु साप को रोज दूध पिलाने लगा। धीरे धीरे रामु पैसादार होने लगा। 

 

एक दिन रामु को अपने कुछ कम से  गावँ से बाहर जाना पड़ा। इस लिए साँप को दूध पिलाने का काम अपने बेटे को  सौंपा। दूसरे दिन रामु का बेटा खेत मे गया और उसे दूध पिलाया। उसने दूसरे दिन उस कटोरे में सोने का सिक्का देखा। फिर उस लड़के को मन मे एक सवाल आया कि यह साँप रोज एक सिक्का देता है तो उसके पेट मे कितना सिक्का होगा? यह सोचने के बाद रामु के लड़के को मन मे लालच आ गया। उसने उस साँप को मारने का प्रयास चालू किया। साँप ने भी अपने बचाव के लिए रामु के बेटे पर प्रहार किया और उसे काल लिया, थोड़ी ही देर में उसकी मृत्यु हो जाती है। 

 

दूसरे दिन जब रामु गांव आया तो सब उसे पता चला। गांव के लोगो ने कहा कि आपके लड़के ने खेत मे रहने वाले साँप को मारने की कोशिश की, पर साँप ने आपके बेटे को काट के मार दिया। और अब हमें उस साँप को भी मर देना चाहिए। रामु ने उस साँप को मारने के लिए मना कर दिया। अपने बेटे का अन्तिमसँस्कार की विधि को छोड़कर पहले के जैसे दूध लेकर खेत मे गया। वहां जाकर दूध से भरा कटोरा साँप के बिल के पास रखा। 

 

दूध के स्मेल से साँप बहार आया और रामु से कहा। वाह रे लालची आदमी, मेने तुम्हारे बेटे को मार दिया, उसका अन्तिमसँस्कार को छोड़ कर तू इधर दूध पिलाने इस लिए आया है की तुझे सोना चाहिए। रामु ने कहा ऐसा नहीं है, गांव के लोग तुझे मारना चाहते है पर मैने उसे मना कर के तुम्हारी जान बचाई है। और तू मेरे ऊपर ऐसा इल्जाम लगा रहा है। साँप ने कहा तुझे सोना चाहिए था इसलिए अपने स्वार्थ के लिए मुझे बचाया। मेरे दया से नहीं ! लालच हो वहां दया नहीं होती।

इस लिए आखरी बार में तुझे सोना नहीं पर सच्चा हीरा इस दूध के बदले भेट में देता हूँ। फिर आजके बाद मुझे दूध पिलाने कभी मत आना। जो इंसान  अपने बेटे का नहीं हो सका वो मेरा क्या होगा। तेरा बेटा तो लालची था ही पर तु तो उस से भी बड़ा लालची है। 

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